मानवता को विचलित करता आतंकवाद

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आजकल कुछ लोग मानवता से अधिक आतंकवाद और आतंकवादियों के बारे में बात करते हुए दिखाई दे रहें हैं।

                                                 लोग लिखा हुआ कम फ़ोटो ज़्यादा समझते हैं,
मनुष्यता कम सेक्यूलरिज़्म ज़्यादा समझते हैं

कहते तो थे कि छुआछूत है बहुत बड़ा अभिशाप,
  लेकिन कट्टर हो गए इतने अब छुआछूत बरतते हैं


कुछ लोग हर खेमे में मौजूद हैं जो तथ्य और सत्य कम विचारधारा ज्यादा समझते हैं। यही विचारधारा आतंकवाद के रूप में दिन प्रतिदिन बढती जा रही है।
जब कोई आतंकवादी हमले होते हैं तो कुछ बुद्धिजीवी लोग यह कहते हुए पाए जाते हैं कि आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता चलो यह मान भी लेते हैं कि उनका कोई धर्म नहीं होता है फिर उनके मरने के बाद किसी धर्म विशेष के काम क्यों होता है। उनके मृत्यु संस्कार में विशेष लोगों का समूह इक्ट्ठा क्यों होता है ?आतंकवादी को कुछ लोग शहीद का दर्जा दे रहे हैं। अजीब दोगलापन है। 

काश्मीर में आतंकवाद राजनीतिक दलों के नेताओं की दृढ़ इच्छाशक्ति की कमी का उत्कृष्ट उदाहरण है। कश्मीरी अलगाववादियों के कारण ही आज काश्मीर अस्थिर है। ये लोग कश्मीरी युवकों का ब्रेन वास करके जेहाद की दुनिया में ढकेल देते हैं जबकि इनके बाल बच्चे विदेशों में उच्च शिक्षा ग्रहण करते हैं। ये बात कश्मीरी युवा पीढ़ी कब तक समझेंगे।
आतंकवाद से सिर्फ मनुष्यता का विनाश होता है

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